मोदी की मेहनत रंग लाई… भारत मिसाइल प्रौद्योगिकी नियन्त्रण व्यवस्था में शामिल...

मोदी की मेहनत रंग लाई… भारत मिसाइल प्रौद्योगिकी नियन्त्रण व्यवस्था में शामिल हो गया।

27 मार्च 2012 में तत्काल कोंग्रेस के मनमोहनसिंह ने न्यूक्लियर क्लब में शामिल होने के लिए दावा कर दिया था..

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नईदिल्ली :: आज भारत मिसाइल प्रौद्योगिकी नियन्त्रण व्यवस्था में शामिल हो गया। मोदी की मेहनत रंग लाई है। मोदी को विदेश में घुमने वाले प्रधानमंत्री के रूप में प्रचारित करने वालों के लिए यह कड़ा जवाब है। अब दुनिया की प्रमुख मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) के सदस्यों ने भारत को भी इसमें शामिल करने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के संदर्भ में इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

34 देशों के इस समूह में भारत को शामिल करने के प्रस्ताव पर किसी भी सदस्य ने आपत्ति नहीं जताई। भारत के इस समूह में शामिल होने से अमेरिका से ड्रोन विमान खरीदने तथा अपने उच्च प्रौद्योगिकी वाले प्रक्षेपास्त्रों का मित्र देशों को निर्यात करने के उसके प्रयासों को बल मिलेगा।

एमटीसीआर की घोषणा के बाद भारत और अमेरिका भारतीय सेना को प्रीडेटर श्रृंखला के मानवरहित विमान बेचने से जुड़ी अपनी चर्चा को तेज कर सकते हैं। इसके अलावा भारत अब ब्रह्मोस जैसी अपने उच्च तकनीकी मिसाइलों को मित्र देशों को बेच देगा।

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एमटीसीआर और तीन अन्य निर्यात नियंत्रण व्यवस्था- ऑस्ट्रेलिया समूह, परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह और वासेनार समझौते में भारत की सदस्यता का कड़ा समर्थन किया था। वहीं भारत के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह का सदस्य बनने के मामले में ओबामा प्रशासन फिलहाल सब अच्छा रहने की ही कामना कर रहा है। चीन इस समूह में भारत की सदस्यता का खुलकर विरोध कर रहा है।

अप्रैल 1987 में स्थापित ऐच्छिक एमटीसीआर का मकसद उन बैलिस्टिक मिसाइलों और दूसरे ऐतिहासिक आपूर्ति तंत्रों के प्रसार को सीमित करना है, जिनका इस्तेमाल रासायनिक, जैविक और परमाणु हमलों के लिए किया जा सकता है। एमटीसीआर अपने 34 सदस्यों से अपील करता है कि 500 किलोग्राम के पेलोड को कम से कम 300 किलोमीटर तक ले जा सकने वाली मिसाइलों और संबधित प्रौद्योगिकियों को और सामूहिक तबाही वाले किसी भी हथियार की आपूर्ति बंद करें। इस समूह में देश के अधिकतर प्रमुख मिसाइल निर्माता शामिल है। वर्ष 2008 के बाद से भारत उन पांच देशों में से एक है, जो एकपक्षीय ढंग से एमटीसीआर के समर्थक हैं।

Building harmony: Prime Minister Manmohan Singh and South Korean President Lee Myung-bak at the first plenary session of the 2012 Nuclear Security Summit at Seoul. Photo: YONHAP/AFP.
Building harmony: Prime Minister Manmohan Singh and South Korean President Lee Myung-bak at the first plenary session of the 2012 Nuclear Security Summit at Seoul. Photo: YONHAP/AFP.

और 27 मार्च 2012 में तत्काल कोंग्रेस के मनमोहनसिंह ने न्यूक्लियर क्लब में शामिल होने के लिए दावा कर दिया था, भारत ने अपनी बेदाग अप्रसार रिकॉर्ड का हवाला देते हुए 27 मार्च 2012 मंगलवार को चार विशेष परमाणु और सामरिक क्लबों की सदस्यता की मांग की थी..!! इन 4 साल की मेहनत के बाद भारत को इस क्लब में जगह मिली है और इस मेम्बरशिप में बड़ी सफलता प्राप्त हुई है, और भारत की ताकत और बढ़ी है…!!!

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