मोदी सरकार को झटका, नमामि गंगे प्रॉजेक्ट पर काम नहीं करेगी जापानी...

मोदी सरकार को झटका, नमामि गंगे प्रॉजेक्ट पर काम नहीं करेगी जापानी कंपनी…

नरेंद्र मोदी सरकार की नमामि गंगे प्रॉजेक्ट को एक और झटका लगा है।

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लखनऊ :: भारत की भाग्यरेखा कही जाने वाली गंगा को निर्मल बनाने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की नमामि गंगे प्रॉजेक्ट को एक और झटका लगा है। जापान की एनजेएस कंसल्टेंट कंपनी इस प्रॉजेक्ट से अलग हो गई है। गंगा ऐक्शन प्लान के सेकंड फेज के लिए तकनीकी परामर्श प्रदान करने वाली इस कंपनी की सेवाएं बंद करने के पीछे सरकार की ओर से अनुबंध न बढ़ाने का कारण भी सामने आया है।

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इससे पहले नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) की तरफ से जनवरी में परियोजना के तहत बजट जारी करने पर रोक लगा दी गई थी। दो साल में जमीनी स्तर पर काम न होने के सवाल पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल कहते हैं कि अभी प्लानिंग लेवल पर ही काम चल रहा है। अगले तीन साल के दौरान गंगा के निर्मलीकरण की दिशा में ठोस काम लोगों को दिखाई देने लगेगा। उन्होंने कहा कि गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए उसमें गिरने वालों व सीवेज को रोकने की दिशा में काम चल रहा है। जब तक गंगा में गिरते नालों को नहीं रोका जाएगा तब तक इसकी प्रगति पर चर्चा करना ठीक नहीं है।

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नमामि गंगे प्रॉजेक्ट से जापानी परामर्श कंपनी एनजेएस कंसल्टेंट के अलग होने की पुष्टि इस कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी की है। उनका कहना है कि 2 साल में कंपनी ने सुझाव दिया। लेकिन उस पर अमल न होने के साथ अनुबंध आगे नहीं बढ़ा इसलिए काम समेटा जा रहा है। यूपी जल निगम के डिवीजनल मैनेजर संजय सिंह ने भी यह बात स्वीकारी है। जापानी कंसल्टेंट कंपनी के अधिकारियों की मानें तो गंगा कार्ययोजना द्वितीय चरण का कार्य जो 2011 में शुरू हुआ वह जुलाई 2015 में खत्म होना था।

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जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) के निर्माण से 140 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के साथ सीवरेज लाइन बिछाने के साथ, पुराने सीवरेज सिस्टम को मरम्मत, पुराने सीवेज पम्पिंग स्टेशनों के आधुनिकीकरण, सामुदायिक शौचालय, धोबी घाट और कई अन्य कार्यों को कराया जाना था। इसके तहत कुछ काम नहीं हुआ।

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गंगा का पानी नहाने लायक भी नहीं गंगा में गंदे नालों के साथ स्लॉटर हाउस के बहते खून के चलते जल की गुणवत्ता दिनों दिन घट रही है। अकेले वाराणसी में ही हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी 350 एमएलडी सीवेज रोजाना गिर रहा है। इसकी वजह से गंगा का पानी नहाने लायक भी नहीं बचा है। गंगाजल में कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी बड़ी संख्या में है। नदी में ई कोलाई बैक्टीरिया है, इस कारण यह जल पीने योग्य नहीं है। इसमें शीशे की मौजूदगी भी है।

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